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शनिवार, 31 अक्तूबर 2026 · रियाद
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सऊदी अरब

जीसीसी महासचिव ने क्षेत्रीय सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने का आह्वान किया

जासिम अल-बदावी ने क्षेत्रीय सुरक्षा को अंतरराष्ट्रीय कानून, साझा रक्षा और कूटनीति के जरिए मजबूत करने की जरूरत बताई और जीसीसी देशों की प्रतिबद्धता दोहराई।

अजेल हिंदी1 घंटे पहले · 3 मिनट का पठन
जीसीसी महासचिव जासिम अल-बदावी क्षेत्रीय सुरक्षा सम्मेलन में

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खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के महासचिव जासिम मोहम्मद अल-बदावी ने कहा है कि परिषद के सदस्य देशों की सुरक्षा अविभाज्य है। उन्होंने क्षेत्रीय सुरक्षा प्रणाली को मजबूत और टिकाऊ बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून और देशों की संप्रभुता के सम्मान पर जोर दिया।

अल-बदावी ने यह बात बहरीन की राजधानी मनामा में आयोजित 22वीं क्षेत्रीय सुरक्षा शिखर बैठक 'मनामा डायलॉग 2026' के तीसरे सत्र 'क्षेत्रीय सुरक्षा के आधार' में भागीदारी के दौरान कही।

उन्होंने बताया कि 28 फरवरी के बाद से क्षेत्र में जो घटनाक्रम हुए हैं, उन्होंने क्षेत्रीय सुरक्षा के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं, खासकर ईरान द्वारा परिषद के देशों और उनकी नागरिक व महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर किए गए हमलों के बाद, जबकि ये देश युद्ध में शामिल नहीं थे और तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहे थे।

अल-बदावी ने कहा कि इन हमलों का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन बाधित हुआ, जिससे ऊर्जा कीमतों, शिपिंग लागत और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर असर पड़ा।

उन्होंने जुलाई से सऊदी अरब पर हौथी मिलिशिया द्वारा किए जा रहे आतंकी हमलों की निंदा की, जिनमें मक्का और मदीना भी निशाना बने। अल-बदावी ने इसे इस्लामी पवित्र स्थलों का उल्लंघन और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया।

अल-बदावी ने कहा कि टिकाऊ क्षेत्रीय सुरक्षा पांच मुख्य स्तंभों पर आधारित है। पहला, अंतरराष्ट्रीय कानून और देशों की संप्रभुता का सम्मान, अच्छे पड़ोसी संबंधों और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान। उन्होंने 11 मार्च 2026 को पारित सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 के कार्यान्वयन की अहमियत बताई, जिसे बहरीन ने जीसीसी और जॉर्डन की ओर से पेश किया था और 136 देशों का समर्थन मिला।

उन्होंने कहा कि सामूहिक रक्षा और खाड़ी सैन्य एकीकरण दूसरा स्तंभ है। अल-बदावी ने जीसीसी देशों की सशस्त्र सेनाओं की तत्परता की सराहना की और जेद्दा में परिषद नेताओं की बैठक में सैन्य एकीकरण बढ़ाने और बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ अर्ली वॉर्निंग सिस्टम को पूरा करने के निर्देशों का उल्लेख किया।

तीसरे स्तंभ के रूप में उन्होंने कूटनीति और शांतिपूर्ण तरीकों से विवादों के समाधान की अहमियत बताई। उन्होंने सभी पक्षों की जिम्मेदार प्रतिक्रिया और आपसी इच्छाशक्ति की जरूरत पर बल दिया और जीसीसी देशों की अंतरराष्ट्रीय व क्षेत्रीय साझेदारियों का उल्लेख किया।

चौथे स्तंभ के तहत अल-बदावी ने कहा कि समुद्री नौवहन और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा साझा अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से होर्मुज और बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य में हमले रोकने और जिम्मेदारों को सजा दिलाने की अपील की, साथ ही जीसीसी देशों द्वारा क्षेत्रीय परियोजनाओं के जरिए ऊर्जा आपूर्ति की लचीलापन बढ़ाने के प्रयासों की बात कही।

पांचवें स्तंभ के रूप में उन्होंने विकास और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के जरिए स्थिरता लाने की बात कही। उन्होंने बताया कि जीसीसी देशों की अर्थव्यवस्था करीब 2.4 ट्रिलियन डॉलर है, जो संकटों से निपटने और स्थिरता बनाए रखने की उनकी क्षमता को मजबूत करती है।

अल-बदावी ने यमन की वैध सरकार, इराक, सीरिया और लेबनान की सुरक्षा के लिए परिषद के समर्थन की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि स्थायी शांति का संबंध फिलिस्तीनी मुद्दे के न्यायसंगत समाधान से है, जिसमें दो-राष्ट्र समाधान शामिल है। इसके अलावा, जल और खाद्य सुरक्षा बढ़ाने तथा जलवायु चुनौतियों से निपटने पर भी जोर दिया।

अंत में अल-बदावी ने कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा केवल शक्ति संतुलन पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसके लिए ऐसी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था चाहिए, जिसे सभी पक्ष मानें और जिसमें क्षेत्रीय देश भी अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने 2024 में घोषित परिषद की क्षेत्रीय सुरक्षा दृष्टि के तहत इस प्रणाली के निर्माण में योगदान देने की जीसीसी देशों की तत्परता दोहराई।

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