पेरिस में डिजिटल सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित
पेरिस में नायफ अरब यूनिवर्सिटी ने डिजिटल युग में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर तीन दिवसीय संगोष्ठी शुरू की।
मुख्य बिंदु
AIफ्रांस की राजधानी पेरिस में कल से "डिजिटल युग में अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए उभरते खतरे" विषय पर अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संगोष्ठी शुरू हुई। इस आयोजन का आयोजन नायफ अरब यूनिवर्सिटी फॉर सिक्योरिटी साइंसेज ने सेंटर फॉर डिप्लोमैटिक एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज के सहयोग से किया है। इसमें अरब देशों के विशेषज्ञों और कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह संगोष्ठी तीन दिन चलेगी।
संगोष्ठी के उद्घाटन में विश्वविद्यालय के विदेश संबंधों के उपाध्यक्ष खालिद बिन अब्दुलअज़ीज़ अल-हरफश ने कहा कि तेज़ी से हो रहे डिजिटल बदलाव, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर स्पेस की प्रगति ने सीमाओं के पार नए तरह के खतरे पैदा किए हैं। ऐसे में सुरक्षित डिजिटल माहौल बनाना सभी की साझा जिम्मेदारी है, जिसके लिए सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, निजी क्षेत्र और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग ज़रूरी है।
अल-हरफश ने बताया कि विश्वविद्यालय, किंग अब्दुलअज़ीज़ बिन सऊद बिन नायफ बिन अब्दुलअज़ीज़ (गृह मंत्री और विश्वविद्यालय के सर्वोच्च परिषद के अध्यक्ष) के निर्देश पर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उभरती तकनीकों और साइबर सुरक्षा को प्राथमिकता देता है। इसी के तहत साइबर अपराध और डिजिटल साक्ष्य केंद्र की स्थापना की गई है, जो अरब क्षेत्र में विशेषज्ञता का केंद्र बनेगा। साथ ही, सुरक्षा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए एक अलग केंद्र भी स्थापित किया गया है, ताकि शोध और डेटा आधारित नवाचार को बढ़ावा मिल सके।
उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय ने तीन प्रमुख शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू किए हैं—साइबर अपराध और डिजिटल फॉरेंसिक में मास्टर डिग्री, सुरक्षा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में मास्टर डिग्री, और साइबर अपराध व डिजिटल फॉरेंसिक में उच्च डिप्लोमा—ताकि आधुनिक तकनीकों से जुड़े सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए योग्य पेशेवर तैयार किए जा सकें।
साइबर खतरों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग
अल-हरफश ने बताया कि विश्वविद्यालय ने 52 से अधिक देशों में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मिलकर दर्जनों वैज्ञानिक और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जिनमें इंटरपोल जैसी संस्थाएँ भी शामिल हैं। साथ ही, विश्वविद्यालय ने सुरक्षा ज्ञान और समकालीन सुरक्षा मुद्दों पर शोध में भी योगदान दिया है।
वहीं, सेंटर फॉर डिप्लोमैटिक एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज के अकादमिक निदेशक डॉ. रिचर्ड अमाल्फी की ओर से डॉ. फुआद नहरा ने कहा कि डिजिटल चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संवाद, अनुभवों का आदान-प्रदान और शैक्षणिक संस्थाओं व विशेषज्ञ संगठनों के बीच प्रभावी साझेदारी बेहद ज़रूरी है। उन्होंने इस क्षेत्र में नायफ विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की।
यह संगोष्ठी दोनों संस्थाओं के बीच हुए समझौते के तहत आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य आधुनिक साइबर खतरों और उनके अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा पर प्रभाव का विश्लेषण, साइबर युद्ध की अवधारणा और उसके प्रकारों पर चर्चा, साइबर अपराधों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढाँचों की समीक्षा, साथ ही राष्ट्रीय क्षमताओं को मजबूत करना और सीमापार साइबर हमलों से निपटने के लिए देशों व अंतरराष्ट्रीय संगठनों के बीच सहयोग के तंत्र विकसित करना है।
