विशेषज्ञ का बयान: सफेद दाग संक्रामक नहीं, जल्दी पहचान से नियंत्रण संभव
कॉमुफ्लाज विशेषज्ञ अमीरा अल अतीबी ने बताया कि सफेद दाग एक ऑटोइम्यून रोग है, जो त्वचा की रंगत खोने और सफेद धब्बे बनने का कारण बनता है। इसका संक्रमण छूने या संपर्क से नहीं फैलता।
मुख्य बिंदु
AIकॉमुफ्लाज विशेषज्ञ अमीरा अल अतीबी ने बताया कि सफेद दाग (विटिलिगो) एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें त्वचा की रंगत खत्म हो जाती है और शरीर के अलग-अलग हिस्सों में सफेद धब्बे उभर आते हैं। यह बीमारी किसी एक कारण से नहीं होती, बल्कि इसमें आनुवांशिक, प्रतिरक्षा और पर्यावरणीय कारकों की भूमिका हो सकती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सफेद दाग बिल्कुल भी संक्रामक नहीं है और यह छूने या संपर्क से नहीं फैलता। कुछ लोगों में इसके लिए आनुवांशिक प्रवृत्ति हो सकती है, लेकिन परिवार में किसी एक को होने का मतलब यह नहीं कि बाकी सदस्य भी जरूर प्रभावित होंगे।
अतीबी ने बताया कि आमतौर पर यह बीमारी हल्के या सफेद धब्बों के रूप में शुरू होती है, जो शरीर के अलग-अलग हिस्सों में नजर आते हैं। कुछ मामलों में ये धब्बे सीमित रहते हैं, जबकि अन्य में धीरे-धीरे फैल सकते हैं। इसका फैलाव और गति हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकती है।
उन्होंने कहा कि कुछ लोगों में सफेद दाग की सक्रियता त्वचा की चोट, धूप से जलन या मानसिक तनाव से जुड़ सकती है, जबकि कई बार बिना किसी स्पष्ट कारण के भी यह सक्रिय हो सकता है। ऐसे में शुरुआती पहचान और त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेकर सही इलाज योजना बनाना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि अधिकांश मरीजों में सफेद दाग की सक्रियता को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन ऐसा कोई इलाज नहीं है जो हर मामले में इसके फैलाव को पूरी तरह रोक सके। इलाज के विकल्प मरीज की उम्र, धब्बों की जगह, प्रभावित त्वचा की मात्रा, बीमारी की सक्रियता और फैलाव के आधार पर तय किए जाते हैं।
अतीबी ने कहा कि त्वचा रोग विशेषज्ञ हर मरीज के लिए इलाज के कई विकल्प चुन सकते हैं, जिनमें कुछ स्थानीय दवाएं, प्रकाश चिकित्सा और नवीनतम उपचार जैसे JAK इनहिबिटर्स शामिल हैं। कुछ मामलों में सर्जिकल प्रक्रियाएं भी अपनाई जा सकती हैं।
उन्होंने बताया कि 'कॉमुफ्लाज' एक सौंदर्य विकल्प है, जिससे त्वचा के रंग को एकसार किया जा सकता है और प्रभावित व आसपास की त्वचा के रंग में अंतर छुपाया जा सकता है। इससे सौंदर्य में सुधार और आत्मविश्वास बढ़ सकता है, लेकिन यह चिकित्सा उपचार या विशेषज्ञ की निगरानी का विकल्प नहीं है।
अतीबी ने सफेद दाग से प्रभावित लोगों को सलाह दी कि वे इलाज योजना का पालन करें, डॉक्टर से नियमित संपर्क में रहें, त्वचा को धूप से बचाएं, चोटों से बचाव करें और बिना प्रमाणित मिश्रण या इलाज का इस्तेमाल न करें। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास का भी ध्यान रखें।
उन्होंने बताया कि सफेद दाग को लेकर कई गलत धारणाएं हैं, जैसे कि यह संक्रामक है, सफाई से जुड़ा है या डर या दुख से होता है। जबकि सच यह है कि यह एक प्रतिरक्षा संबंधी बीमारी है और संपर्क से नहीं फैलती।
अतीबी ने जोर देकर कहा कि सफेद दाग किसी व्यक्ति की कीमत या सुंदरता तय नहीं करता। सही तरीका है जागरूकता, समय पर पहचान और इलाज। उन्होंने समाज से अपील की कि वे गलत धारणाओं से बचें और प्रभावित लोगों को मानसिक और सामाजिक समर्थन दें।
