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शनिवार, 29 अगस्त 2026 · रियाद
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सऊदी अरब

यमनी राष्ट्रपति ने सऊदी अरब के निरंतर समर्थन की सराहना की

यमनी राष्ट्रपति रशाद अलअलीमी ने सरकारी सुधार कार्यक्रम के लिए सऊदी अरब के उदार और निरंतर समर्थन पर आभार जताया।

अजेल हिंदी1 घंटे पहले · 2 मिनट का पठन
यमनी राष्ट्रपति रशाद अलअलीमी सऊदी सहयोग पर बोलते हुए

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यमनी राष्ट्रपति परिषद के अध्यक्ष डॉ. रशाद अलअलीमी ने सरकारी सुधार कार्यक्रम के लिए सऊदी अरब के भाइयों द्वारा दिए जा रहे उदार और निरंतर समर्थन के लिए गहरी कृतज्ञता जताई है। इसमें आम बजट को सहयोग, कर्मचारियों के वेतन के नियमित भुगतान, बुनियादी सेवाओं में सुधार और विभिन्न क्षेत्रों में विकास व मानवीय परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता शामिल है।

अलीमी ने सऊदी अरब के साथ साझेदारी को एक आदर्श बताया, जिससे समर्थन सुधार, स्थिरता और संस्थागत पुनर्निर्माण के लिए सहायक बना है। उन्होंने योजना मंत्रालय को इस दिशा में आगे बढ़ने, दाताओं और क्षेत्रीय-अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ विश्वास बढ़ाने और उनकी भागीदारी को विस्तार देने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि राज्य नागरिकों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभा सके।

यमनी समाचार एजेंसी 'सबाअ' के अनुसार, राष्ट्रपति ने आपातकालीन जरूरतों के प्रबंधन से आगे बढ़कर पुनर्निर्माण और विकास की योजना बनाने, प्राथमिकता वाले परियोजनाओं की पहचान करने और समाज की मजबूती के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, बिजली, खाद्य सुरक्षा, आजीविका और बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता बताई।

राष्ट्रपति ने इस संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय और मानवीय संगठनों को, जो अस्थायी राजधानी अदन में काम कर रही हैं, विशेष महत्व देने, उनकी गतिविधियों में किसी भी प्रशासनिक या प्रक्रियागत बाधा को दूर करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सहायता सभी प्रांतों में जरूरतमंदों तक पहुंचे।

अलीमी ने युद्ध से प्रभावित शरणार्थियों और सबसे अधिक पीड़ित वर्गों को अंतरराष्ट्रीय सहयोग की प्राथमिकता में रखने, मेज़बान क्षेत्रों में बुनियादी सेवाओं को बेहतर बनाने और मानवीय सहायता को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आजीविका के अधिक टिकाऊ कार्यक्रमों से जोड़ने की जरूरत पर बल दिया। साथ ही, विस्थापितों की स्वैच्छिक, सुरक्षित और गरिमापूर्ण वापसी के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने की बात कही।

राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय स्तर पर परियोजनाओं, जरूरतों और अंतरराष्ट्रीय वित्त पोषण का डाटा बेस विकसित करने की अहमियत भी बताई, जिससे सरकार संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, अंतर के निर्धारण और विकास व मानवीय हस्तक्षेपों के वास्तविक प्रभाव का आकलन कर सके।

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