एफआईआई प्रमुख: सऊदी में बायोटेक नवाचार को निवेश में बदलने पर ज़ोर
एफआईआई प्रमुख राजकुमारी महा ने रियाद बायोटेक समिट में कहा—सतत साझेदारियाँ, बायोटेक नवाचार को स्वास्थ्य व अर्थव्यवस्था के लिए निवेश में बदलेंगी।
मुख्य बिंदु
AIएफआईआई (फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव) फाउंडेशन की सीईओ राजकुमारी डॉ. महा बिंत मशारी बिन अब्दुलअज़ीज़ अल सऊद ने राष्ट्रीय बायोटेक्नोलॉजी रणनीति के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आर्थिक, निवेश और वैज्ञानिक साझेदारियों के निर्माण की अहमियत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि बायोटेक नवाचार और वैज्ञानिक शोध को व्यावहारिक उत्पादों और निवेश में बदलना जरूरी है, जिससे स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था दोनों को लाभ हो।
वह रियाद में 14 से 16 सितंबर 2026 तक चल रही चौथी ग्लोबल मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी समिट में बोल रही थीं।
यह समिट क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के संरक्षण में आयोजित हो रही है, जो रियाद बायोटेक्नोलॉजी सेंटर के चेयरमैन भी हैं। समिट का उद्घाटन गार्ड नेशनल गार्ड मंत्री प्रिंस अब्दुल्ला बिन बंदर ने किया।
इस समिट में दुनियाभर के विशेषज्ञ, शोधकर्ता, इनोवेटर, निवेशक और नीति-निर्माता जुटे हैं। वे मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी के नवीनतम रुझानों, भविष्य की संभावनाओं और सहयोग के अवसरों पर चर्चा कर रहे हैं, ताकि ज्ञान और नवाचार को आर्थिक और स्वास्थ्य लाभ में बदला जा सके।
राजकुमारी महा ने अपने संबोधन में अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की भूमिका पर ज़ोर दिया, जिससे सऊदी की बायोटेक्नोलॉजी प्रणाली को मजबूती मिले और राष्ट्रीय वैज्ञानिक क्षमताओं को वैश्विक पूंजी और विशेषज्ञता से जोड़ा जा सके। इससे अनुसंधान और नवाचार को दीर्घकालिक आर्थिक और स्वास्थ्य लाभ देने वाले निवेश और उद्योगों में बदला जा सकेगा।
उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत किंग सलमान और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में सऊदी अरब में हो रहे विकास और आर्थिक बदलावों का उल्लेख करते हुए की। उन्होंने कहा कि इस नेतृत्व ने विज्ञान, नवाचार और जीवन विज्ञान अर्थव्यवस्था में सऊदी की भूमिका को मज़बूत किया है।
राजकुमारी ने गार्ड नेशनल गार्ड मंत्री प्रिंस अब्दुल्ला बिन बंदर को स्वास्थ्य लचीलापन और राष्ट्रीय लक्ष्यों के मेल के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही, डॉ. बंदर अल क़नावी (नेशनल गार्ड हेल्थ अफेयर्स के कार्यकारी निदेशक) को नवाचार और स्वास्थ्य सेवा के विकास में योगदान के लिए सराहा।
राजकुमारी महा ने बताया कि राष्ट्रीय बायोटेक्नोलॉजी रणनीति एक समग्र प्रणाली की नींव रखती है, जिसमें अनुसंधान, स्थानीय वैक्सीन निर्माण, दवाओं और बायोलॉजिक्स का स्थानीयकरण, जीनोमिक्स, सटीक निदान, लक्षित उपचार, खाद्य सुरक्षा और स्थिरता से जुड़ी बायोटेक्नोलॉजी समाधान शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि इस रणनीति का लक्ष्य 2040 तक गैर-तेल जीडीपी में 34 अरब डॉलर से अधिक का योगदान करना है। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य और आर्थिक लाभ के लिए जरूरी है कि वैज्ञानिक नवाचार शोध से आगे बढ़कर व्यावसायिक और निवेश योग्य बने।
राजकुमारी ने दीर्घकालिक निवेश के लिए वैज्ञानिक खोजों को जोड़ने वाली प्रणाली के निर्माण की ज़रूरत बताई, जिससे राष्ट्रीय आकांक्षाओं और वैश्विक विशेषज्ञता का मेल हो और सऊदी में प्रतिस्पर्धी, टिकाऊ बायोटेक्नोलॉजी सेक्टर विकसित हो।
उन्होंने बताया कि Flagship Pioneering, Novo Holdings और WuXi AppTec जैसी वैश्विक कंपनियाँ भी इस क्षेत्र में भाग ले रही हैं। उन्होंने पूंजी, अनुसंधान, विकास और निर्माण के एकीकरण की अहमियत बताई, जिससे नवाचार को ठोस आर्थिक और स्वास्थ्य लाभ में बदला जा सके।
राजकुमारी ने कहा कि बायोटेक्नोलॉजी में तेज़ी से हो रहे बदलाव अब डेटा, कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से गहराई से जुड़े हैं। सऊदी के पास डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, कंप्यूटिंग, ऊर्जा, डेटा और संस्थागत समर्थन जैसी क्षमताएँ हैं, जिससे वह इस बदलाव का लाभ उठा सकता है।
उन्होंने विज्ञान और स्वास्थ्य तकनीक में निवेश के प्रभाव के उदाहरण दिए, जैसे—शादी से पहले अनुवांशिक रोगों की जांच का सऊदी कार्यक्रम और रियाद में किंग फैसल स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल द्वारा CAR-T कोशिकाओं का स्थानीय निर्माण। इससे उन्नत चिकित्सा तकनीकों के स्थानीयकरण और आधुनिक उपचारों की पहुँच बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि 2040 तक औसत जीवन प्रत्याशा में पाँच साल की बढ़ोतरी का लक्ष्य स्वास्थ्य और बायोटेक निवेश के मानवीय पहलू को दर्शाता है, जिसका सीधा असर व्यक्ति, परिवार और समाज की जीवन गुणवत्ता पर पड़ेगा।
राजकुमारी ने कहा कि वैश्विक बायोटेक्नोलॉजी सेक्टर के निर्माण के लिए देशों, संस्थाओं, निवेशकों और वैज्ञानिकों के बीच साझेदारी जरूरी है, जिसमें पूंजी, विचार, वैज्ञानिक और कार्यान्वयन क्षमताएँ एक साथ आएँ।
उन्होंने बताया कि एफआईआई फाउंडेशन निवेशकों, वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं को जोड़कर इस दिशा में काम कर रही है। अगले महीने रियाद में होने वाला एफआईआई10 सम्मेलन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जीनोमिक्स, प्रिवेंटिव हेल्थकेयर और उनसे जुड़ी निवेश संभावनाओं पर केंद्रित रहेगा।
राजकुमारी ने कहा कि इन साझेदारियों का मकसद सिर्फ संवाद या अनुभव साझा करना नहीं, बल्कि कंपनियों की स्थापना, तकनीकों और उपचारों का विकास और नवाचार को मरीजों व समाज तक पहुँचाना है।
अंत में उन्होंने कहा कि तकनीक का मकसद मानवता की सेवा होना चाहिए। सऊदी वैज्ञानिक क्षमताओं और पूंजी को वैश्विक प्रणालियों से जोड़ना, देश के बायोटेक लक्ष्यों, जीवन गुणवत्ता और व्यापक स्वास्थ्य-आर्थिक प्रभाव को आगे बढ़ाएगा।
