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सूडानी महिलाओं ने संकट में भी समाज की एकता संभाली

युद्ध के दौरान सूडानी महिलाओं ने समाज की रक्षा, आय सृजन और राहत, स्वास्थ्य, मीडिया व आर्थिक पहलों में अहम भूमिका निभाई।

अजेल हिंदी1 घंटे पहले · 3 मिनट का पठन
सूडानी महिलाएँ सामूहिक रसोई में काम करती हुईं

मुख्य बिंदु

AI

सूडान समाचार एजेंसी की महिला केंद्रित बुलेटिन ने अरब समाचार एजेंसियों के संघ की महिला मीडिया सेवा के तहत, सार्वजनिक जीवन और कार्यक्षेत्र में सूडानी महिलाओं की भूमिका और अप्रैल 2023 में शुरू हुई युद्ध की वजह से महिलाओं और उनके परिवारों पर पड़े प्रभाव को उजागर किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध ने सूडानी महिलाओं के सामने असाधारण हालात और दोगुनी जिम्मेदारियाँ ला दीं। उन्हें वैकल्पिक आय के स्रोत तलाशने, संकट प्रबंधन और परिवार की देखभाल के साथ-साथ जीवन में टिके रहने के नए तरीके ईजाद करने पड़े।

महिलाओं ने राहत, स्वास्थ्य देखभाल और सामूहिक रसोई जैसी पहलों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। वे स्वास्थ्य सेवाएँ देती रहीं, आर्थिक और उत्पादन संबंधी परियोजनाएँ शुरू कीं। बड़ी संख्या में महिलाओं ने छोटे घरेलू उद्योग और उत्पादन गतिविधियाँ शुरू कीं और डिजिटल माध्यमों से विपणन का लाभ उठाया।

रिपोर्ट में बताया गया कि सूडान में महिलाओं की श्रम बाजार में भागीदारी 20वीं सदी की शुरुआत में लड़कियों की शिक्षा के प्रसार के साथ शुरू हुई। उनका पेशेवर और विधायी संस्थानों में दखल बढ़ा और 2015 में संसद में उनका प्रतिनिधित्व 30% तक पहुँच गया। विश्व बैंक के 2022 के आँकड़ों के अनुसार, श्रम शक्ति में महिलाओं की भागीदारी लगभग 14.5% रही।

युद्ध का श्रम बाजार पर असर और राहत में महिलाओं की भूमिका

युद्ध के चलते कारखाने, बाजार और बुनियादी ढाँचा ठप हो गया, बड़ी संख्या में परिवार विस्थापित हुए और आय के स्रोत छिन गए। इन हालात में महिलाओं ने सामुदायिक पहलें जैसे 'तकाया' और सामूहिक रसोई शुरू कीं, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और सेवाओं में छोटे उद्योग स्थापित किए, जिससे परिवारों को सहारा मिला और बाजारों में हलचल बनी रही।

स्वास्थ्य क्षेत्र में महिला डॉक्टरों और नर्सों ने अस्पतालों, राहत केंद्रों और विस्थापितों के शिविरों में सेवाएँ जारी रखीं।

युद्ध के दौर में सूडानी महिला पत्रकारों का जज़्बा

ओमदुरमान इस्लामिक यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता एवं मीडिया की प्रोफेसर डॉ. सलवा हसन सिदीक ने कहा कि युद्ध के दौरान सूडानी महिला पत्रकारों ने जोखिम और पारिवारिक दबावों के बावजूद जनजागरूकता और घटनाओं की रिपोर्टिंग में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि महिला पत्रकारों ने सरकारी संस्थानों, अखबारों और मीडिया प्लेटफॉर्म्स के ज़रिए अपनी जिम्मेदारी निभाई और राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक मुद्दों पर चर्चा को आगे बढ़ाया।

सूडानी महिलाओं की मीडिया में उपस्थिति 1950-60 के दशक से है, जब अग्रणी महिलाओं ने पत्रकारिता और महिला बौद्धिक गतिविधियों की नींव रखी।

महिला उद्यमी और संकट में आर्थिक पहलें

सूडान चैंबर ऑफ कॉमर्स की आर्थिक सेवाएँ शाखा की उपाध्यक्ष सामिया शब्बो ने बताया कि महिला उद्यमियों ने विस्थापन के बावजूद अपने आर्थिक उपक्रमों को बनाए रखने और खाद्य प्रसंस्करण व हस्तशिल्प उद्योगों में नए सिरे से काम शुरू करने की कोशिश की। उन्होंने विपणन और काम के नए रास्ते खोजे, भले ही संसाधन सीमित थे।

शब्बो ने कहा कि महिला-नेतृत्व वाले प्रोजेक्ट्स ने स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन में योगदान दिया। महिला उद्यमियों ने प्रभावित परिवारों और सामुदायिक पहलों को भी समर्थन दिया। उन्होंने महिलाओं को उत्पादन क्षमता लौटाने के लिए वित्त, ऊर्जा, उपकरण और उत्पादों को घरेलू व विदेशी बाजारों से जोड़ने की जरूरत पर ज़ोर दिया।

रिपोर्ट के निष्कर्ष में कहा गया कि सूडानी महिलाएँ युद्ध की सिर्फ गवाह नहीं रहीं, बल्कि वे रोज़मर्रा की ज़िंदगी के प्रबंधन, सामाजिक ताने-बाने की रक्षा और सम्मानजनक जीवन की बुनियादी ज़रूरतें जुटाने में मुख्य भूमिका निभा रही हैं।

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