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संयुक्त राष्ट्र महासचिव की दौड़: गुटेरेस के उत्तराधिकारी पर बहस

संयुक्त राष्ट्र महासभा में छह उम्मीदवारों के बीच महासचिव पद के लिए अहम बहस हुई, जबकि संगठन वित्तीय संकट और घटती विश्वसनीयता से जूझ रहा है।

अजेल हिंदी20 मिनट पहले · 3 मिनट का पठन
संयुक्त राष्ट्र महासभा में महासचिव पद के उम्मीदवारों की बहस

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संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव के चयन की दौड़ निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। महासभा कक्ष में छह उम्मीदवारों के बीच बहस ऐसे समय में हुई, जब संगठन गंभीर वित्तीय संकट और घटती विश्वसनीयता से जूझ रहा है, साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार का दबाव भी बढ़ रहा है। सुरक्षा परिषद गुटेरेस के उत्तराधिकारी के चयन के लिए पहले अनौपचारिक मतदान की तैयारी कर रही है।

महासभा कक्ष में चिली की मिशेल बाशेलेट, इक्वाडोर की मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा, अर्जेंटीना के राफाएल ग्रोसी, कोस्टा रिका की रेबेका ग्रीनस्पैन, गुयाना की कैरोलिन रोड्रिगेज-बोर्केट और सेनेगल के मकी साल के बीच बहस हुई। 90 मिनट की इस बहस में उम्मीदवारों ने राजनयिकों, संयुक्त राष्ट्र कर्मियों और नागरिक समाज के सवालों के जवाब दिए। अब तक किसी एक उम्मीदवार को स्पष्ट बढ़त नहीं मिली है।

महासभा अध्यक्ष एनालेना बेयरबॉक ने कहा कि यह चर्चा उम्मीदवारों के विचार, प्राथमिकताएं और दुनिया के सबसे अहम पदों में से एक के लिए उनकी दृष्टि जानने का दुर्लभ मौका है। उन्होंने जोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र को ऐसी नेतृत्व क्षमता चाहिए, जो संगठन को 21वीं सदी की चुनौतियों के अनुरूप ढाल सके और उसके तीन स्तंभ—शांति व सुरक्षा, मानवाधिकार और विकास—की मजबूती से रक्षा कर सके।

संयुक्त राष्ट्र को ट्रंप प्रशासन की ओर से खर्च और भूमिकाओं के बिखराव को लेकर आलोचना झेलनी पड़ रही है। वॉशिंगटन चाहता है कि संगठन शांति और सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करे, जबकि अन्य देश सभी स्तंभों को अहम मानते हैं। सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य, जिनमें अमेरिका भी शामिल है, चयन प्रक्रिया में वीटो का अधिकार रखते हैं। इससे उम्मीदवारों को अमेरिकी मांगों और अन्य देशों की प्राथमिकताओं के बीच संतुलन साधना पड़ता है।

'इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप' के विश्लेषक रिचर्ड ग्वान के मुताबिक, इस बार की दौड़ 2016 के मुकाबले कम जोशपूर्ण है, क्योंकि उम्मीदवार बड़ी ताकतों को नाराज करने से बचना चाहते हैं। इससे पहले उम्मीदवारों ने सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के सामने कड़ी पूछताछ का सामना किया, जिसमें उन्होंने सुधार और शांति स्थापना में महासचिव की भूमिका को अहम बताया।

सुरक्षा परिषद 30 जुलाई को गुप्त मतदान के जरिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार पर पहली बार रायशुमारी करेगी। इसके बाद मतदान के कई दौर होंगे, जब तक किसी उम्मीदवार को स्थायी सदस्यों के वीटो के बिना नौ वोट नहीं मिल जाते। फिर उसका नाम औपचारिक नियुक्ति के लिए महासभा को भेजा जाएगा और जनवरी 2027 में वह पदभार संभालेगा।

कई राजनयिकों ने अब तक अपनी पसंद तय नहीं की है। ग्वान मानते हैं कि राफाएल ग्रोसी सबसे प्रबल दावेदार हैं, लेकिन ग्रीनस्पैन और रोड्रिगेज-बोर्केट जैसे अन्य उम्मीदवारों के साथ प्रतिस्पर्धा खुली है। अप्रत्याशित नामों की भी चर्चा है, जैसे कि जियानी इन्फेंटिनो, जिनके बारे में रिपोर्ट है कि ट्रंप उन्हें नामित करना चाहते हैं।

गौरतलब है कि लैटिन अमेरिकी देश इस बार अपने किसी नागरिक के महासचिव बनने की मांग कर रहे हैं। साथ ही, कई देश पहली बार किसी महिला के इस पद पर नियुक्त होने का समर्थन कर रहे हैं, जो भौगोलिक विविधता के परंपरागत (लेकिन बाध्यकारी नहीं) सिद्धांत पर आधारित है।

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