जाज़ान में 2.3 करोड़ से अधिक मैन्ग्रोव पेड़ पर्यावरण को संबल
जाज़ान के तटीय इलाकों में फैली मैन्ग्रोव वनस्पति पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलन का उदाहरण है।
मुख्य बिंदु
AIजाज़ान क्षेत्र के तटों पर फैली मैन्ग्रोव की घनी वनस्पति पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के बीच संतुलन का बेहतरीन उदाहरण है। ये वन तटीय पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता में अहम भूमिका निभाते हैं। हर साल 26 जुलाई को मनाए जाने वाले विश्व मैन्ग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण दिवस के मौके पर इन प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को रेखांकित किया जाता है, जो जलवायु परिवर्तन से निपटने और जैव विविधता की रक्षा में मददगार हैं।
राष्ट्रीय वृक्षारोपण कार्यक्रम की कोशिशों से जाज़ान के तटीय इलाकों में अब तक 2.3 करोड़ से अधिक मैन्ग्रोव के पेड़ लगाए जा चुके हैं। यह पहल देश की राष्ट्रीय योजनाओं का हिस्सा है, जिसका मकसद हरित आवरण बढ़ाना, तटीय पर्यावरण की सुरक्षा मजबूत करना और पारिस्थितिकी तंत्र की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।
मैन्ग्रोव के पेड़ कई पर्यावरणीय भूमिकाएँ निभाते हैं। ये तटीय कटाव से रक्षा करते हैं, मिट्टी को स्थिर रखते हैं और उसके बहाव को रोकते हैं। साथ ही, इनमें कार्बन सोखने और संग्रहित करने की जबरदस्त क्षमता होती है, जिससे जलवायु परिवर्तन के प्रभाव कम करने और पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है।
मैन्ग्रोव वनस्पति कई जीवों का प्राकृतिक आवास है और प्रवासी पक्षियों के लिए विश्राम और भोजन का ठिकाना भी। ये समुद्री जीवों के लिए पोषक वातावरण और भोजन का स्रोत हैं, जिससे मछलियों की संख्या बढ़ती है और तटीय इलाकों की मत्स्य संपदा को मजबूती मिलती है।
सऊदी अरब अपनी पर्यावरणीय पहलों के जरिए मैन्ग्रोव वनों के विस्तार और संरक्षण पर लगातार काम कर रहा है। इन वनों का पर्यावरणीय और आर्थिक महत्व है, जो सतत विकास के लक्ष्यों, हरित आवरण बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा में सहायक हैं।
