किंग सलमान रॉयल रिजर्व में गिद्धों की संख्या में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
किंग सलमान रॉयल रिजर्व ने गिद्धों की सुरक्षा और जैव विविधता बढ़ाने में असाधारण सफलता हासिल की है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली भी संभव हुई है।
मुख्य बिंदु
AIकिंग सलमान रॉयल रिजर्व के विकास प्राधिकरण ने गिद्धों की सुरक्षा और जैव विविधता को बढ़ाने के क्षेत्र में असाधारण उपलब्धियाँ दर्ज की हैं, जिनका असर पारंपरिक प्रजातियों की रक्षा से आगे बढ़कर पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली तक पहुँचा है।
रिजर्व के आधिकारिक "एक्स" अकाउंट पर जारी बयान के अनुसार, गिद्धों की सुरक्षा के लिए लगातार निगरानी, सुरक्षित भोजन स्थलों की व्यवस्था, पशु चिकित्सा संबंधी जोखिमों में कमी और विषाक्तता व अवैध शिकार को रोकने जैसे कदम उठाए गए हैं।
इन वैज्ञानिक और मैदानी प्रयासों का सीधा असर गिद्धों की संख्या और उनके घोंसलों पर दिखा है। नसर असमर (ग्रिफॉन वल्चर) की संख्या 300 से अधिक पहुँच गई है, जो 328% की वृद्धि है, जबकि घोंसलों की संख्या 83 तक पहुँच गई है, जिसमें 295% की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। नसर अज़ून (लैम्मरगियर) की संख्या लगभग 35 हो गई है, जो 776% की वृद्धि है, और 10 नए घोंसले दर्ज किए गए हैं, जिसमें 900% की बढ़ोतरी हुई है।
मिस्री गिद्ध की संख्या भी 37 तक पहुँच गई है, जो 1,750% की वृद्धि है, और 3 नए सफल घोंसले दर्ज किए गए हैं, जिससे रिजर्व में इनका पुनः घोंसला बनाना प्रमाणित हुआ है।
इन उपलब्धियों को वैश्विक महत्व इसलिए भी प्राप्त है क्योंकि रिजर्व में 5 ऐसे क्षेत्र हैं, जो विश्व स्तर पर पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यहाँ की जैव विविधता संबंधी जानकारी ने सऊदी अरब में पहले प्रमुख जैव विविधता स्थल की घोषणा में भी योगदान दिया है, जिससे पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संतुलन में रिजर्व की अग्रणी भूमिका और मजबूत होती है।
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