प्रभावी संवाद संगठन के लक्ष्यों की समझ से शुरू होता है: सुल्तान
रियाद में 'क़लम अल-धहबी' में अब्दुलरहमान बिन सुल्तान सुल्तान की नई किताब के विमोचन पर संवाद की भूमिका और उसके व्यावहारिक पक्षों पर चर्चा हुई।
मुख्य बिंदु
AIरियाद स्थित 'क़लम अल-धहबी' दीवान में आज लेखक और रणनीतिक संवाद विशेषज्ञ अब्दुलरहमान बिन सुल्तान सुल्तान की किताब 'रणनीतिक संवाद: सिद्धांत से व्यवहार तक आपका व्यावहारिक मार्गदर्शक' के विमोचन समारोह का आयोजन हुआ, जिसमें मीडिया और संवाद क्षेत्र के कई विशेषज्ञ शामिल हुए।
समारोह में सुल्तान ने बताया कि यह किताब रणनीतिक संवाद पर अरबी भाषा में विशेष संदर्भों की आवश्यकता के मद्देनज़र लिखी गई है, ताकि पेशेवर अनुभव और ज्ञान नई पीढ़ी के मीडिया और संवाद कर्मियों तक पहुँच सके।
उन्होंने कहा कि संवाद अब संस्थाओं के लिए गौण नहीं, बल्कि मुख्य और केंद्रीय भूमिका निभाता है। 'रणनीतिक संवाद' की अवधारणा संवाद को संगठन के उच्च लक्ष्यों से जोड़ती है और उनके हासिल करने में मदद करती है।
सुल्तान ने संवाद क्षेत्र में तेज़ी से हो रहे बदलावों के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए निरंतर प्रशिक्षण और ज्ञान साझा करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने अनुभवी पेशेवरों की जिम्मेदारी बताई कि वे अपने अनुभवों को दर्ज करें और अगली पीढ़ी के साथ साझा करें, जिससे पेशेवर ज्ञान का संचय और व्यावहारिकता में सुधार हो।
उन्होंने बताया कि विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रशिक्षुओं के साथ काम करते हुए उन्होंने अकादमिक शिक्षा और रोज़मर्रा के संवाद कार्य की ज़रूरतों के बीच एक खाई महसूस की। यह किताब उसी खाई को पाटने का प्रयास है, जिसमें संक्षिप्त और व्यावहारिक जानकारी दी गई है, जो अत्यधिक सैद्धांतिकता से दूर है।
सुल्तान ने कहा कि किताब का उद्देश्य संवाद विषयों को सरल और संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक 400-500 शब्दों के लेखों के ज़रिए सिद्धांत से व्यवहार तक आसानी से पहुँच सकें।
उन्होंने अपनी 25 वर्षों से अधिक की पेशेवर यात्रा साझा की, जिसमें उन्होंने सरकारी, निजी और गैर-लाभकारी क्षेत्रों में संवाद का अनुभव हासिल किया। उन्होंने बताया कि किताब की नींव 'अल-रियाद' अख़बार में लिखे गए लेखों और व्याख्यानों से पड़ी, जो बाद में पेशेवर अनुभव और अकादमिक ज्ञान का मेल बन गई।
सुल्तान ने बताया कि किताब में सरल और सीधी भाषा का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें सफलता और विफलता की वास्तविक कहानियाँ और ताज़ा आँकड़े शामिल हैं, ताकि विशेषज्ञ और इच्छुक लोग रणनीतिक संवाद की अवधारणाओं को व्यवहार में उतार सकें।
उन्होंने सऊदी विज़न 2030 के तहत बीते वर्षों में संवाद कार्य में आए बदलावों का ज़िक्र किया और कहा कि आगे विशेषज्ञों की ज़िम्मेदारी और बढ़ गई है कि वे इस बदलाव को गहरा करें और संवाद को संगठनात्मक कार्य का केंद्रीय हिस्सा बनाएं।
सुल्तान ने अनुभवों और ज्ञान के दस्तावेज़ीकरण को भविष्य के निर्माण की बुनियाद बताया और उम्मीद जताई कि यह किताब विशेषज्ञों के लिए आसान व्यावहारिक संदर्भ बनेगी, नई पीढ़ी को अनुभव सौंपेगी और पेशेवर स्तर को ऊँचा करेगी।
सुल्तान ने 'क़लम अल-धहबी' दीवान को समारोह की मेज़बानी और रचनात्मकता को समर्थन देने के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही उन्होंने यासिर मदखली और जनरल एंटरटेनमेंट अथॉरिटी के अध्यक्ष तुर्की बिन अब्दुलमोहसिन अल शेख का भी आभार जताया।
समारोह के दौरान लेखक के साथ एक खुली चर्चा भी हुई, जिसमें रणनीतिक संवाद की अवधारणाओं, उसके व्यावहारिक प्रयोगों, पेशेवरों को आने वाली चुनौतियों और संवाद गतिविधियों को रणनीतिक लक्ष्यों से जोड़ने की अहमियत पर बात हुई।

