मक्का रक्षा समझौता सैन्य गठबंधन या हथियारों की दौड़ नहीं: विदेश मंत्रालय
सऊदी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मक्का रक्षा समझौता कोई सैन्य गठबंधन या हथियारों की दौड़ नहीं, बल्कि सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराने रणनीतिक संबंधों का परिणाम है।
मुख्य बिंदु
AIविदेश मंत्रालय में जन कूटनीति के उप सचिव, राजदूत रायद क़रमली ने कहा है कि मक्का रक्षा समझौता वर्षों तक चली विस्तृत वार्ताओं का परिणाम है और यह सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराने रणनीतिक और ऐतिहासिक संबंधों को दर्शाता है।
क़रमली ने "एक्स" मंच पर अपने पोस्ट में स्पष्ट किया कि यह समझौता तीनों देशों को साझा रक्षा क्षमताएँ विकसित करने, रणनीतिक प्रतिरोध को मजबूत करने और तैयारियों को बढ़ाने का अवसर देता है। साथ ही, यह किसी भी खतरे के खिलाफ संयुक्त रूप से रक्षा क्षमताओं के विकास और समन्वय पर केंद्रित है, जिससे उनकी भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने बताया कि समझौते के तहत, यदि तीनों में से किसी एक देश पर बाहरी सशस्त्र हमला होता है, तो उसे सभी पर हमला माना जाएगा। यह प्रावधान हस्ताक्षरकर्ता पक्षों के बीच साझा रक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए है।
जन कूटनीति के उप सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि यह समझौता किसी सैन्य गठबंधन, सांप्रदायिक या धार्मिक गुट के निर्माण की दिशा में नहीं है, न ही इसका संबंध परमाणु प्रयासों या हथियारों की दौड़ से है। इसका उद्देश्य केवल आत्मनिर्भर और टिकाऊ क्षमताओं का निर्माण करना है।
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उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता सऊदी अरब के खाड़ी, अरब और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रणनीतिक संबंधों पर असर नहीं डालता, न ही यह क्षेत्र के किसी देश की सुरक्षा के लिए खतरा है या किसी दो देशों के बीच तनाव बढ़ाता है।
क़रमली ने यह भी स्पष्ट किया कि मक्का रक्षा समझौता किसी भी द्विपक्षीय या बहुपक्षीय समझौतों को रद्द या प्रतिस्थापित नहीं करता, जो इन तीन देशों के बीच या अन्य देशों व संगठनों के साथ हैं।
