मक्का समझौते के अमल से बनेगी मज़बूत सुरक्षा व्यवस्था: विश्लेषक
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. बरका अल-हौशन ने कहा कि मक्का रक्षा समझौते के अमल में आने से यह एक व्यावहारिक सुरक्षा प्रणाली में बदल जाएगा।
मुख्य बिंदु
AIराजनीतिक विश्लेषक डॉ. बरका अल-हौशन ने मक्का रक्षा समझौते के हस्ताक्षर से आगे बढ़कर उसकी राजनीतिक और रक्षा संबंधी व्यवस्थाओं के अमल में आने के महत्व को रेखांकित किया।
अल-हौशन ने "इख़बारिया रेडियो" पर बातचीत में कहा कि मक्का रक्षा समझौते के अमल में आने से यह केवल एक राजनीतिक ढाँचे से आगे बढ़कर एक व्यावहारिक सुरक्षा प्रणाली का रूप ले लेता है।
उन्होंने बताया कि यह समझौता सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान की दीर्घकालिक सुरक्षा ढाँचा बनाने की मंशा को दर्शाता है, जो केवल एक गठबंधन से कहीं आगे है। तीनों देशों की अलग-अलग क्षमताएँ इस गठबंधन की ताकत हैं — सऊदी अरब की आर्थिक और राजनीतिक हैसियत और इस्लामी दुनिया में भूमिका, पाकिस्तान का परमाणु शक्ति होना और तुर्की के पास नाटो का दूसरा सबसे बड़ा सैन्य बल और व्यावहारिक अनुभव है।
राजनीतिक विश्लेषक ने आगे कहा कि इन तीनों की संयुक्त क्षमताएँ एक मज़बूत प्रतिरोधक शक्ति बनाती हैं, और इनकी विविधता से क्षेत्र में एक ऐसा गठबंधन उभरता है, जिसे गंभीरता से लिया जाएगा।
X प्लेटफ़ॉर्म पर ट्वीट देखें
